भूस्खलन के खतरे के बाद भी विस्थापित नहीं हुए ग्रामीण, शासन को रिपोर्ट भेजने के बावजूद नहीं हुई कार्यवाही

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बागेश्वर: जनपद आपदा के दृष्ट्रिकोण से अतिसंवेदनशील जाना जाता है। खासतौर पर कपकोट ब्लॉक। शासन-प्रशासन की बेरुखी के चलते यहाँ के ग्रामीण अपने को ठगा-सा महसूस करने हैं।  जिले के करीब साढ़े तीन सौ परिवार इस साल फिर आपदा के साये में रहेंगे। जिला प्रशासन और राज्य सरकार की उपेक्षा के कारण इन परिवारों को बरसात के दौरान रातभर जगकर अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा करने को मजबूर होना होगा। यह आरोप ग्रामीणों का है।

बागेश्वर जनपद के कुंवारी, सूपी, कर्मी, बड़ेत, लीती, बघर समेत 24 गांवों के 351 परिवार इस बार भी बरसात में बेघर होके रहने को मजबूर होंगे। जिला प्रशासन के मुताबिक भी 24 परिवारों के घरों पर भूस्खलन का खतरा है और इन्हें विस्थापित किया जाना जरूरी है। कुंवारी गांव में भारी भूस्खलन के बाद 2016 में जिला प्रशासन ने 19 गांवों के विस्थापन की सूची शासन को भेजी। इसके लिए कुछ धनराशि भी मिली लेकिन खर्च होने से पहले ग्रामीणों में विवाद हो गया। जिस स्थान पर ग्रामीण बसना चाहते थे वहां दूसरे गांव ने आपत्ति जता दी। तब से जिला प्रशासन आज तक भी दूसरे स्थान की तलाश नहीं कर सका है। जिला प्रशासन यही राग अलापने में है कि शासन को संवेदनशील और अतिसंवेदनशील क्षेत्रों की सूची भेजी गयी है। कुछ क्षेत्रों के लिये बजट दिया गया जो कि सभी जगहों के हालातों को ठीक करने के लिए प्रयाप्त नहीं था। अब जिला प्रशासन बजट के इंतजार में चुपचाप हो किसी बड़े हादसे के इंतजार में बैठा है।

वहीँ जिलाधिकारी का मामले में कहना है जनपद बागेश्वर में आपदा की ड्रिस्ट्री से कपकोट तहसील अतिसंवेदनशील है। वर्ष 2010-2013 की आपदा से कपकोट में 24 ग्रामो को काफी नुकसान हुआ ऐसे ग्रामों को चिन्हित कर विस्थापन की कार्यवाही की जा रही है। शासन को पूरी रिपोर्ट हमने भेजी है। हालंकि कुछ ग्रामो में जमीन तलाशने की कार्यवाही पूरी न होने कारण देरी हो रही है। कुछ ग्रामीण अपनी पुरानी जगह नहीं छोड़ रहे है। इस कारण  विस्थापन में विलम्भ हो रहा है।

शासन-प्रशासन की लेटलतीफ़ी कहीं इन विस्थापित ग्रामो के ग्रामीणों को हादसे के रूप में भुगतना न पड़ जाय। ऐसे में जरुरत है तुरंत विस्थापन की कार्यवाही शासन करे ताकि कोई बड़ा हादसा होने से टाला जाय।

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