लिंचिंग मामलों पर सेलेब्स ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, अल्पसंख्यक मंत्री बोले- अवार्ड वापसी पार्ट-2

Please Share

नई दिल्ली: अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने बुधवार को लिंचिंग की घटनाओं को लेकर विभिन्न क्षेत्रों के 49 प्रतिष्ठित लोगों द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं को खारिज कर दिया और कहा कि देश में दलित और अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं। उन्होने कहा ‘हमने 2014 लोकसभा चुनाव के बाद अवार्ड वापसी के नाम से एक ही चीज़ देखी। यह केवल उसका दूसरा भाग है,’ मंत्री ने इसे गैरजरूरी करार दिया। नकवी ने कहा, लोकसभा चुनाव में हार के बाद आपराधिक घटनाओं को सांप्रदायिकता का रंग देने की कोशिश की जा रही है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला खत लिखा गया था। इस पर फिल्म निर्माता श्याम बेनेगल, अनुराग कश्यप, मणिरत्नम, अदूर गोपालकृष्णन, अपर्णा सेन, केतन मेहता, सिंगर शुभा मुद्गल, अभिनेत्री सौमित्रा चटर्जी, कोंकणा सेन शर्मा, इतिहासकार सुमित सरकार, तनिका सरकार, पार्था चटर्जी और रामचंद्र गुहा के अलावा लेखक अमित चौधरी ने हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने मुस्लिमों, दलितों और अन्य समुदायों के लोगों को पीट-पीटकर मार डालने की घटनाओं को तुरंत रोकने की मांग की थी। साथ ही, कहा था कि जय श्रीराम अब युद्धघोष बन चुका है। सेलेब्स की ओर से यह पत्र 23 जुलाई को भेजा गया था।

पत्र में कहा गया है कि ‘मुस्लिमों, दलितों और अन्य अल्पसंख्यकों की लिंचिंग को तत्काल रोका जाना चाहिए। एनसीआरबी (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो) की रिपोर्टों से हमें यह जानकर धक्का लगा कि 2016 में दलितों पर अत्याचार के 840 से कम उदाहरण नहीं मिले हैं और दोषियों के प्रतिशत में निश्चित गिरावट आई है। ‘आगे, 1 जनवरी, 2009 और 29 अक्टूबर, 2018 के बीच 254 धार्मिक पहचान-आधारित घृणा अपराधों की रिपोर्ट की गई, जहां कम से कम 91 लोग मारे गए और 579 घायल हुए।  इन हमलों का प्रतिशत मई 2014 के बाद दर्ज किया गया था, जब आपकी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता संभाली थी।’

यह पूछते हुए कि अपराधियों के खिलाफ ‘वास्तव में’ क्या कार्रवाई की गई है, लेखकों ने कहा, ‘हम दृढ़ता से महसूस करते हैं कि ऐसे अपराधों को गैर-जमानती घोषित किया जाना चाहिए, और अनुकरणीय सजा तेजी से और निश्चित रूप से पूरी की जानी चाहिए। अगर पैरोल के बिना आजीवन कारावास हत्या के मामलों में सजा हो सकती है, तो लिंचिंग के लिए क्यों नहीं, जो और भी अधिक घृणित हैं? किसी भी नागरिक को अपने देश में भय में नहीं रहना चाहिए।’

पत्र में कहा गया है कि जय श्री राम, ‘पछतावा करने वाला’, एक ‘उत्तेजक युद्ध-रोना’ बन गया है, जो कानून और व्यवस्था की समस्याओं की ओर ले जाता है, और इसके नाम पर कई लिंचिंग होती हैं, पत्र ने कहा,’ यह चौंकाने वाला है कि इतनी हिंसा सिर्फ धर्म के नाम पर हो रही है! ये मध्य युग नहीं हैं! भारत के बहुसंख्यक समुदाय में राम का नाम कई लोगों के लिए पवित्र है। इस देश के सर्वोच्च कार्यकारी के रूप में, आपको इस तरीके से राम के नाम पर अड़ंगा लगाना चाहिए।’

अपर्णा सेन ने मीडिया से कहा: ‘हमने प्रधान मंत्री के समक्ष दो अपील की हैं। हमने दलितों और अल्पसंख्यकों पर लिंचिंग की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। इस अपराध के अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन पर गैर-जमानती धाराएं लगाई जानी चाहिए। दूसरा, हमने कहा है कि लोगों को विरोध प्रदर्शन करने या अपनी असहमति व्यक्त करने का अधिकार होना चाहिए। उन्हें देश-विरोधी या शहरी नक्सलियों का ब्रांड नहीं बनाया जाना चाहिए। हम सिर्फ पीएम मोदी को हस्तक्षेप करना चाहते हैं।’

admin

Passionate about independent journalism and committed to delivering timely, accurate news to our readers. As the driving force behind Hindi News Bharat, I focus on bringing important regional and national stories to light, ensuring that truthful reporting remains at the forefront of digital media.

You May Also Like