अफजल गुरु के बेटे ने कहा: भारतीय होने पर गर्व, मां ने आतंकवादी बनने से बचा लिया

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नई दिल्ली: संसद हमले के दोषी जम्मू-कश्मीर निवासी अफजल गुरु के बेटे 18 वर्षीय गालिब गुरु ने कहा कि उन्हें भारतीय होने पर गर्व है। उन्होंने कहा कि पिता को फांसी दिए जाने के बाद उन्हें बदला लेने के लिए काफी उकसाया गया, लेकिन उनकी मां ने उन्हें आतंकवादी बनने से बचा लिया। अब उनके पास अपनी पहचान साबित करने के लिए आधार कार्ड भी है। गालिब गुरु ने अब पासपोर्ट के लिए आवदेन किया है।

मालूम हो कि अफजल गुरु के बेटे गालिब गुरु ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा काफी अच्छे अंकों से पास की है। समाचार एजेंसियों से की गई बातचीत में गालिब ने कहा कि वह डॉक्टर बनना चाहते हैं। गालिब के अनुसार वह पांच मई 2019 को होने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि वह इस परीक्षा में चयनित हो जाएंगे। अगर उन्हें भारत में मेडिकल में प्रवेश नहीं मिला तो वह विदेश जाकर मेडिकल की पढ़ाई करना चाहते हैं। गालिब ने बताया कि तुर्की के एक कॉलेज से उन्हें स्कॉलरशिप भी मिल सकती है। विदेश जाकर मेडिकल की पढ़ाई करने और विदेशी विश्वविद्यालय से छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए उन्हें भारतीय पासपोर्ट की जरूरत है।

गालिब ने बताया कि उन्हें अपनी पहचान साबित करने के लिए आधार कार्ड प्राप्त हो चुका है। इसके बाद उन्होंने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया है। अगर उन्हें पासपोर्ट भी मिल जाता है तो उन्हें बहुत खुशी होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि मुझे भारतीय होने पर गर्व है। अगर मुझे पासपोर्ट मिल जाता है, तो मुझे और गर्व होगा। गालिब, फिलहाल गुलशनाबाद की पहाड़ियों पर अपने नाना गुलाम मुहम्मद और मां तबस्सुम के साथ रहते हैं।

गालिब बताते हैं कि उनके पिता अफजल गुरु को फांसी होने के बाद घाटी में सक्रिय आतंकी संगठनों ने उन्हें पिता की मौत का बदला लेने के लिए बहुत उकसाया था। उनका माइंड वॉश करने का कई बार प्रयास किया गया। इन संगठनों का मकसद गालिब को आतंकी बनाकर भारत के खिलाफ प्रयोग करने का था। गालिब ने बताया कि हमने पूर्व में हुई गलतियों से बहुत कुछ सीखा है। इसलिए वह आतंकियों के जाल से बच गए। इसका क्रेडिट वह अपनी मां को देते हैं। गालिब के अनुसार उनकी मां ने उन्हें आतंकवादी बनने से बचा लिया।

गालिब के अनुसार वह अपने पिता का अधूरा सपना पूरा करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता भी डॉक्टर बनना चाहते थे, लेकिन वह अपना मेडिकल करियर पूरा नहीं कर सके। लिहाजा अब वह अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर पिता के सपने को साकार करना चाहते हैं।

 

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