देहरादून: (Dehradun Rishikesh Four Lane Project) देहरादून ऋषिकेश नेशनल हाईवे पर भानियावाला और रानीपोखरी के बीच प्रस्तावित फोरलेन सड़क परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, इस परियोजना के तहत राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 4,300 से अधिक पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है।
पेड़ों की कटाई के विरोध में स्थानीय निवासी और पर्यावरण कार्यकर्ता मौके पर पहरा दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे इस परियोजना के लिए प्रस्तावित पेड़ों की कटाई और सड़क निर्माण का विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे राजाजी टाइगर रिजर्व के पर्यावरण और वन्यजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
वहीं, दूसरी ओर इस परियोजना को लेकर एक बड़ा वर्ग इसे जनहित और राज्य के विकास के लिए आवश्यक बता रहा है। उनका कहना है कि भानियावाला रानीपोखरी ऋषिकेश मार्ग उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को पूरे गढ़वाल क्षेत्र से जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। लंबे समय से यह हिस्सा संकरा होने के कारण एक प्रमुख बॉटलनेक बना हुआ है, जिससे अक्सर यातायात प्रभावित होता है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। (Dehradun Rishikesh Four Lane Project)
यह मार्ग राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरता है, जहां दिन और रात दोनों समय वन्यजीवों की आवाजाही होती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, विशेष रूप से रात्रि के समय इस मार्ग पर यात्रा करना चुनौतीपूर्ण माना जाता है। सड़क के चौड़ीकरण से यात्रियों, स्थानीय निवासियों, पर्यटकों, आपातकालीन सेवाओं और इस मार्ग पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की उम्मीद जताई जा रही है।
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परियोजना के समर्थकों का यह भी कहना है कि यदि सड़क निर्माण के साथ वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप अंडरपास अथवा अन्य आवश्यक संरचनाएं विकसित की जाती हैं, तो वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। साथ ही, काटे गए पेड़ों के बदले नियमानुसार प्रतिपूरक वृक्षारोपण, उसकी दीर्घकालिक देखरेख और पारदर्शी निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनका मानना है कि पर्यावरण संगठनों और स्थानीय नागरिकों को भी इस प्रक्रिया की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, ताकि लगाए गए पौधों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके। (Dehradun Rishikesh Four Lane Project)
देहरादून हरिद्वार हाईवे के चौड़ीकरण के बाद यात्रा समय में आई कमी का उदाहरण देते हुए परियोजना के समर्थकों का कहना है कि बेहतर सड़क अवसंरचना से आम जनता को प्रत्यक्ष लाभ मिलता है। उनका मानना है कि यदि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर सभी वैधानिक और पर्यावरणीय शर्तों का पालन किया जाए, तो यह परियोजना राज्य की कनेक्टिविटी, सड़क सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
फिलहाल यह परियोजना विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर व्यापक चर्चा का विषय बनी हुई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान पर्यावरणीय मानकों, वन्यजीव संरक्षण और प्रतिपूरक वृक्षारोपण से जुड़े प्रावधानों का किस प्रकार प्रभावी और पारदर्शी ढंग से पालन सुनिश्चित किया जाता है। (Dehradun Rishikesh Four Lane Project)