हेलीपैड निर्माण मामला, शासन की अनदेखी या फिर है मिलीभगत!

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देहरादूनः उत्तराखंड एक पहाड़ी राज्य है जिसके कई जनपद अतिसंवेदनशील क्षेत्र में आते हैं। लेकिन बावजूद यह सब जानते हुए भी जनपद रूद्रप्रयाग में ऐसे कामों को किया जा रहा है जो क्षेत्र के साथ-साथ हिमालय के लिए भी घातक सिद्ध हो सकते हैं।

दरअसल जनपद में इन दिनों तीन नये हैलीपैडों का निर्माण किया जा रहा है और दो-तीन और हैलीपैड बनाने की कवायाद चल रही है जबकि यह क्षेत्र अतिसंवेदनशील क्षेत्र है। हैरत की बात तो यह है कि पूर्व में उत्तराखंड नागरिक उड्डयन सचिव द्वारा महानिदेशक नागरिक उड्डयन भारत सरकार को 9 जून 2016 को एक पत्र भी सौंपा है कि घाटी में हम 14 ही हैलीपैड़ बनाने की अनुमति दे सकते हैं, साथ ही विभाग ने निर्णय लिया कि घाटी में नये हैलीपैड नहीं बनवाए जा सकते हैं।

तस्वीरों में आप साफ देख सकते हैं कि किस प्रकार यहां पर हैलीपैड बनाने का काम बड़ी ही शीघ्रता के साथ चल रहा है।

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वहीं हैलो उत्तराखंड न्यूज ने जब इस बाबत जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग मंगलेश घिल्डियाल से पूछा तो उन्होंने कहा कि हमें भी इस प्रकार की जानकारी मिली है जिसके बाद निर्माण कार्य को रोक दिया गया है। लेकिन उपर दी गई तस्वीरों में आप साफ़ देख सकते हैं कि किस प्रकार निर्माण कार्य जारी है, और जो तस्वीरें हम आपको दिखा रहे हैं वो कल की ही हैं, जो अपने आप में बयां कर रही हैं कि कोई भी निर्माण कार्य नहीं रोका गया है।

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बता दें कि घाटी अतिसंवेदनशील क्षेत्र में आती है। आपदा के बाद से ही यहां पर हैली सेवाओं को तवज्जो दिया गया। लेकिन अब कहीं ऐसा न हो कि सेवाओं की आड़ में घाटी को नुकसान पहुंचाया जा रहा हो। इससे न केवल मनुष्य पर प्रभाव पड़ेगा बल्कि हिमालय तक को इसका असर झेलना पड़ेगा क्योंकि 2016 के बाद घाटी में कोई अन्य हैलीपैड बनाने की अनुमति नहीं है।

गौरतलब है कि इससे इसी साल अप्रैल मई 2017 में घाटी के भडासू में एक और हैलीपैड बनाया गया जो कॉटेज बनवाने के पारित हुआ था, लेकिन कॉटेज न बना के इस पर 15 वां हैलीपैड का निर्माण किया गया जबकि 9 जून 2016 के बाद घाटी में कोई नया हेलिपैड नहीं बनाया जा सकता था। हालांकि इस 15वें  हैलीपैड निर्माण के दौरान एसडीएम उखीमठ ने निर्माणाधीन हेलीपैड को सीज भी किया था, और चालान भी काटा था, लेकिन बाद में किसी मिली भगत से हेलीपैड ही बना दिया गया जिससे यह साफ है कि सरकार ने अपने ही शासनादेश का उल्लगन किया है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर कोई सख्त रूख अपनाता है या फिर मिलीभगत में साथ देकर पर्यायवरण को हानि पहुंचाकर और सरकारी आदेशों का उलंघन कर हैलीपैड का निर्माण करवाती है?

 

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