अधिकारीयों की मिलीभगत से ऊर्जा प्रदेश बन रहा है घोटाला प्रदेश!

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देहरादून : उत्तराखंड का यूपीसीएल और उरेडा अपने कार्यों के लिए तो चर्चाओं में तो बना रहता ही है, लेकिन अब यह दोनों निगम अपना नाम गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज़ करा सकता है। रिकॉर्ड बनाने का कारण दोनों के द्वारा किये कार्य हैं।

क्या है मामला पढ़िए यह खास रिपोर्ट

केंद्र सरकार ने  सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन के साथ रोजगार और पहाड़ से पलायन रोकने के लिए 3000 मेगावाट ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सोलर पावर प्लांट योजना उत्तराखंड को दी थी। इस योजना में केंद्र सरकार की तरफ से लाभार्थी को 70 फीसदी सब्सिडी देने का प्रावधान भी था।

इस तरह UREDA ने क़रीब 80 से 90 करोड़ रुपए का भुगतान आवंटित भी कर दिया। सब्सिडी की धनराशि का लाभ उरेडा के अधिकारियों और रिश्तेदार के साथ अधिकारीयों के मित्रों को भी मिला। अधिकारियों द्वारा सब्सिडी की बंदरबांट अपने करीबियों को प्लांट का आवंटन कर किया गया।

इस योजना में MNRE द्वारा तय क़ीमत के हिसाब से सात करोड़ प्रति मेगावाट की दर से क़रीब 44 मेगावाट के प्लांट घरों की छतों पर लगाने की संस्तुति की गयी थी, जिससे उत्पादित बिजली को यूपीसीएल 25 साल तक खरीदता। इस परियोजना के तहत आम लोगों को रोजगार भी मिलता।

जिस दिन ये स्कीम लॉंच हुई एक घंटे के अंदर सभी आवेदन UREDA में जमा हो गए। इन आवेदकों में ज्यादातर UREDA के अधिकारियों के रिश्तेदार और दोस्त शामिल थे। हद तो तब हुई जब एक अधिकारी ने अपनी पत्नी के नाम पर ही प्रोजेक्ट को आवंटित करा दिया। इतना ही नहीं एक ही प्लांट को तीन बार अलग-अलग दिशाओं के गेट दिखा कर तीन सब्सिडी भी रिलीज़ करा लीं गईं, जबकि सब्सिडी की 50 फीसद रकम में इन अधिकारियों ने अपने दोस्त और रिश्तेदारों  को 100 परसेंट सब्सिडी रिलीज़ कर दी। लेकिन अन्य आवंटियों को अभी तक सब्सिडी ही नहीं मिली।

गाइड-लाइन में स्पष्ट है कि सब्सिडी घरों की छतों और उससे लगी हुई ज़मीन पर ही दी जानी थी। लेकिन वो कृषि भूमि पर लगवा दिए गए। बाद में जब ग़लती पकड़ी गई तो अपनी ग़लती छुपाने के लिए कृषि भूमि (Land Use) ही बदलवा दी गयी, और यह काम भी प्रशासन के उस समय के एक बड़े अधिकारी के इशारे पर हुआ था।  इन आला अधिकारी ने सभी डीएम और एसडीएम को पत्र लिख कर कृषि भूमि पर लगे इन प्लांटों का लैंड यूज़ बदलवाने का आदेश पारित किया।

जब इस अनियमितता को लेकर कुछ लोगों ने भारत सरकार की “मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एण्ड रिन्यूवल इनर्जी” (MNRE) से शिकायत की तो MNRE ने इस मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की। टीम MNRE के एक अफसर, सोलर इनर्जी ऑफ इंडिया के ज्वाइंट डायरेक्टर और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर इनर्जी के डायरेक्टर के साथ एक ज्वाइंट टीम ने रेंडमली 11 प्लांटों की अचानक जांच की। जांच में 3.85 मेगावाट के 10 प्लांट ऐसे पाए गए जिन्हें सब्सिडी नहीं सकती थी। इसके बाद भी उन्हें 100 प्रतिशत सब्सिडी रिलीज़ कर दी गई। जांच में अनियमितता पाए जाने के बाद MNRE ने सब्सिडी वापस करने का उरेडा को आदेश दिया है। 3.85 मेगावाट  का क़रीब 18 करोड़ 86 लाख 50 हज़ार रुपए बनती है, लेकिन ये सब्सिडी अभी तक वापस नहीं की गई। 

हल ही में यूपीसीएल को उत्तराखंड विधुत नियमक आयोग ने प्रदेश के घरों को बिजली कनेक्शन की लेटलतीफी के कारण लगभग 14 करोड़ का आर्थिक दंड लगाया है। जबकि इस विभाग के साथ  साथ उरेडा की कारस्तानी का भी जवाब नहीं। उरेडा ने प्रेदश के 7 ग्रिड कनेक्शन रूफटॉप सोलर पावर प्लांट धरातल पर लगाकर प्रदेश को बिजली भी देना शरू कर दिया है।

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