नेता प्रतिपक्ष को इलाज के लाले पड़ गए तो आम नागरिक की स्थिति की कल्पना आसानी से की जा सकती – सूर्यकांत धस्माना

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देहरादून: उत्तराखंड राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की जर्जर हालत का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब राज्य की सबसे वरिष्ठ राजनेता जिनका पचास वर्ष लंबा संसदीय कैरियर हो जो उत्तरप्रदेश में तीस वर्षों तक उच्च सदन की सदस्य व उत्तराखंड में एक बार को छोड़ सभी विधानसभा में सदस्य दस वर्ष मंत्री व वर्तमान में विपक्ष की नेता हों, उनको अपने इलाज के लिए दर दर भटकना पड़े तो आप अंदाज़ लगा सकते हैं कि राज्य के आम नागरिक की क्या स्थिति होगी। इस राज्य में यह बात आज उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने अपने कैम्प कार्यालय में पत्रकार वार्ता में कही।

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उन्होंने राज्य की नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर इंदिरा हृदयेश जो कि कोरोना संक्रमण से ग्रसित पाई गईं हैं, का प्रकरण का हवाला देते हुए कहा कि तीन दिन पहले उनका कोविड19 टेस्ट पॉजिटिव पाए जाने पर उन्हें हल्द्वानी के डॉक्टर सुशीला तिवारी हस्पताल में भर्ती करवाया गया जहां उचित इलाज की सुविधा नहीं होने पर सरकार द्वारा उनको एयर ऐम्बुलेंस से कल देहरादून दोपहर मैक्स हस्पताल लाया गया जहां उनको साड़े पांच घण्टे जांच के लिए रक्खा गया। किन्तु कोई कक्ष अलॉट नहीं किया गया, जिस पर जब उन्होंने वहां से अन्यत्र इलाज करवाने को कहा, तो उनको पैंतालीस हज़ार का बिल थमा दिया गया। 

धस्माना ने कहा कि वहां से छुट्टी लेने के बाद डॉक्टर इंदिरा हृदयेश ने उनको इस बाबत सूचित किया तो उन्होंने सिनर्जी हस्पताल में डॉक्टर इंदिरा की व्यवस्था करवाई जहां वे रातभर रह कर आज दोपहर एयर ऐम्बुलेंस से गुरुग्राम मेदांता हस्पताल चली गईं।

धस्माना ने कहा कि इस पूरे प्रकरण से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गयी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अगर सरकारी हस्पताल तो छोड़िए एक नामी निजी हस्पताल में राज्य की सबसे वरिष्ठ राजनेता को इलाज के लिए भर्ती नहीं करवा पा रही है तो आम नागरिक की क्या दशा होगी इसकी कल्पना आसानी से की जा सकती है।

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धस्माना ने कहा कि राज्य में कोरोना जिस गति से बढ़ रहा है और मरीजों के मरने का सिलसिला जिस प्रकार से थमने का नाम नहीं ले रहा है, उससे आने वाले दिनों के बारे में लोगों में दहशत का माहौल बन गया है। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह से आत्मसमर्पण मोड में आंखें मूंदे बैठी हैं और हस्पतालों में बिस्तर आईसीयू व वेंटिलेटर सब फुल हो चुके हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि तत्काल राज्य में एक लाख बिस्तर व दस हज़ार ऑक्सीजन युक्त बिस्तर की व्यवस्था आपतलालीन परिस्तिथियों के लिए तैयार किये जाए।

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