महंगाई के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन नौटंकी, बार्कलेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था 8.5 प्रतिशत की ग्रोथ रेट से बढ़ेगी – भगत

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देहरादून 6 मार्च: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वंशीधर भगत ने कहा कि महंगाई को लेकर कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत नौटंकी कर रहे हैं।
भगत ने कहा कि बेशक, डीजल और पेट्रोल के दाम कुछ बढ़े है, लेकिन महंगाई अभी उस स्तर से बहुत दूर है जो कि कांग्रेस के कार्यकाल में रही है। आम लोगों के दैनिक उपयोग की खाद्यान्न वस्तुयें आसानी से पहुँँच में है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश की अर्थ व्यवस्था प्रगति की ओर है और कई अंतरास्ट्रीय संस्थाओ के शोध में यह बात सामने आई है।
भगत ने कहा कि कोरोना संकट के बावजूद देश की अर्थ व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था बार्कलेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था 8.5 प्रतिशत की ग्रोथ रेट से बढ़ेगी। पहले इसने 2021-22 के लिए 7 प्रतिशत ग्रोथ रेट का अनुमान लगाया था। क्योंकि दुनिया की दूसरी सबसे अधिक आबादी वाले देश में कोरोना के मामले कम हो रहे हैं और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है। गोल्डमैन सैश ने 2020-21 में भारत की जीडीपी के 13 प्रतिशत की रफ्तार से ग्रोथ करने का अनुमान जताया है।
उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही सेंसेक्स ने जून 2014 में पहली बार 25 हजार के स्तर को छुआ था। मोदी राज में पिछले 6 साल में 25 हजार से 50 हजार तक के सफर तय कर सेंसेक्स दो गुना हो गया है। पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के दौरान अप्रैल 2014 में सेंसेक्स करीब 22 हजार के आस-पास रहता था। रोज रिकॉर्ड तोड़ता शेयर बाजार इस बात का सबूत है कि प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है।उससे तमाम क्षेत्रों की कंपनियों में विश्वास जगा है। नोटबंदी और जीएसटी जैसे आर्थिक सुधारों के कदम उठाने के बाद कोरोना काल में भी आर्थिक जगत में मोदी सरकार की साख मजबूत हुई है और कंपनियां, शेयर बाजार, आम लोग सभी सरकार की नीतियों पर भरोसा कर रहे हैं। जाहिर है यह भारतीय अर्थव्यवस्था मनिवेशकों के भरोसे को दिखाता है।
रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार इस दौरान विदेशी मुद्रा भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा यानी विदेशी मुद्रा एसेट्स 150 मिलियन डॉलर बढ़कर 541.791 अरब डॉलर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा भंडार ने 5 जून, 2020 को खत्म हुए हफ्ते में पहली बार 500 अरब डॉलर के स्तर को पार किया था। इसके पहले यह आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था। कोरोना संकट के बावजूद 2020-21 के अप्रैल-अगस्त में देश में 27.1 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है। यह 2019-20 की समान अवधि में आए 23.35 अरब डॉलर के निवेश से 16 प्रतिशत ज्यादा है।
इसके साथ ही 2008 से 2014 में 231.37 अरब डॉलर की तुलना में 2014 से 2020 में कुल एफडीआई प्रवाह 55 प्रतिशत उछलकर 358.29 अरब डॉलर रहा। मंत्रालय के अनुसार सरकार की ओर से पिछले छह साल में किए गए सुधारों से एफडीआई में तेजी आई है। इसके साथ ही उन नीतिगत बाधाओं को भी दूर किया गया है, जो निवेश प्रवाह को बाधित कर रहे थे। निवेश को सुगम बनाने और कारोबार सुगमता के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं।
भगत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत बनी हुई है। कोरोना महामारी और तमाम विपरीत परिस्थियों के बावजूद मोदी सरकार की नीतियों के चलते देश की इकोनॉमी वृद्धि कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र की दूरदर्शी योजनाओं के चलते राज्य विकास की ओर अग्रसर है और लोग अब कांग्रेस के भ्रामक प्रचार् से ऊब चुके हैं।

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