पुरी (ओडिशा): ओडिशा के पुरी में विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ जारी है। भारी बारिश के बावजूद अनुमानित 10 लाख से अधिक श्रद्धालु जगन्नाथ धाम पहुंचे और भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र तथा देवी सुभद्रा के दिव्य दर्शन किए।
रथ यात्रा के शुभारंभ पर पारंपरिक पाहंडी अनुष्ठान के तहत भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को श्रीमंदिर से विधि-विधान के साथ बाहर लाकर उनके भव्य रथों पर विराजमान किया गया। इसके बाद तीनों रथों की यात्रा श्रद्धालुओं के जयघोष के बीच प्रारंभ हुई। (Jagannath Rath Yatra 2026)
पुरी में रथ यात्रा का मुख्य मार्ग बड़ा डांडा (ग्रैंड रोड) श्रद्धालुओं से पूरी तरह भर गया। चूंकि रथ यात्रा इसी मार्ग से होकर गुजरती है, इसलिए अधिकांश श्रद्धालु यहीं एकत्रित हुए और भगवान के दर्शन किए।
2026 Big Boost for Uttarakhand! Uttarakhand Aviation Academy: उत्तराखंड में बनेगी राज्य की पहली एविएशन एकेडमी, सभी जिला मुख्यालयों को हवाई सेवा से जोड़ने की तैयारी
रथ यात्रा केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह लगभग 9 दिनों तक चलने वाला धार्मिक महोत्सव है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहते हैं। इसके बाद बहुदा यात्रा (वापसी यात्रा), सुना बेष (स्वर्ण अलंकरण) और नीलाद्रि बीजे जैसे प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों के साथ महोत्सव का समापन होता है। (Jagannath Rath Yatra 2026)
प्रशासन को उम्मीद है कि 27 जुलाई को नीलाद्रि बीजे तक पुरी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ बनी रहेगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु दर्शन व्यवस्था के लिए व्यापक सुरक्षा एवं यातायात प्रबंध किए गए हैं।
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े और प्रसिद्ध धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है, जिसमें हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। (Jagannath Rath Yatra 2026)
सुरक्षा के लिहाज से भी पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए ओडिशा सरकार और प्रशासन ने बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों के साथ-साथ एनएसजी कमांडो भी सुरक्षा निगरानी में तैनात किए गए हैं। भीड़ प्रबंधन, आपात स्थिति से निपटने और पूरे आयोजन पर नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक और विशेष सुरक्षा दलों की मदद ली जा रही है।