जीआरपी के जवानों ने पत्रकार को बुरी तरह पीटा जमकर की अमानवीयता,एसएचओ और एक कॉन्स्टेबल निलंबित

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शामली: जीआरपी के जवानों ने एक न्यूज़ चैनल के संवाददाता के साथ न केवल मारपीट की, बल्कि उन्हें हिरासत में लेकर उनके साथ बेहद बुरा सुलूक भी किया। यूपी के डीजीपी ने इस मामले में शामली जीआरपी के एसएचओ और एक कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर हमले तेज़ हो गए हैं। अभी प्रशांत कनौजिया समेत अन्य पत्रकारों की गिरफ़्तारी का मामला ठंडा भी न हुआ था कि अब शामली में जीआरपी के जवानों एक न्यूज़ चैनल के संवाददाता के साथ न केवल मारपीट की, बल्कि उन्हें हिरासत में लेकर अमानवीयता भी की। पत्रकार को पीटे जाने के इस मामले में यूपी पुलिस के डीजीपी ओपी सिंह ने तत्काल प्रभाव से शामली जीआरपी एसएचओ राकेश कुमार और कांस्टेबल संजय पवार को निलंबित कर दिया गया है।

 

घटना के मुताबिक शामली में न्यूज़ 24 चैनल के पत्रकार अमित शर्मा बुधवार तड़के धीमनपुरा में ट्रेन के पटरी से उतरने की सूचना मिलने पर उसे कवर करने पहुंचे थे। इसी मौके पर मौके पर मौजूद सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) के जवानों ने उनसे मारपीट की और कैमरा भी छीन लिया। इस दौरान उनका एक मोबाइल फोन भी गुम गया। आरोप है कि ये पुलिस वाले अमित शर्मा की इससे पहले उनके कथित भ्रष्टाचार को उजागर करने वाली एक रिपोर्ट से नाराज़ थे। पत्रकार अमित शर्मा का कहना है कि पुलिस वालों ने उनकी एक न सुनी और पिटाई करते रहे। इसके बाद उन्हें हवालात में बंद कर दिया। इसके बाद अमित को रात भर थाने में बैठाए रखा गया। साथी पत्रकारों के धरने के बाद सुबह उन्हें  छोड़ा गया।

घटना की जानकारी मिलने पर कई स्थानीय पत्रकार थाने पहुंचे और वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क की कोशिश की। स्थानीय पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर अमित शर्मा की पिटाई का वीडियो भी डाल दिया। जो वायरल हो गया और पूरे देश को इसकी ख़बर मिली।

मारपीट के अलावा अमित शर्मा के हवालात में बंद होने का एक और वीडियो सामने आया है जिसमें आरोपी जीआरपी जवान आराम से बैठा है और अमित शर्मा सलाखों के पीछे से अपने ऊपर हुई ज़्यादती का बयान कर रहे हैं।

स्थानीय पत्रकारों के दबाव में रिपोर्टर अमित शर्मा को हवालात से बाहर निकाला गया। अमित शर्मा ने खुद अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी। पत्रकार अमित शर्मा ने बताया। वे सादे कपड़ों में थे। एक ने उन्हें मारा तो कैमरा गिर गया। जब उसे उठाने लगा तो उन्होंने मुझे मारा और गालियां दीं। मुझे लॉकअप में बंद कर दिया गया। फोन छीन लिया गया और उन्होंने मेरे मुंह में पेशाब कर दिया।

आपको बता दें कि यूं तो देशभर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले बढ़े हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर इस तरह की कार्रवाई में तेज़ी आई है। अभी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सोशल मीडिया पर तथाकथित आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए एक पोस्ट साझा करने के आरोप में पत्रकार प्रशांत कनौजिया को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया था। इसी मामले में उनके अलावा कुछ अन्य पत्रकार भी गिरफ्तार हुए। जिसके विरोध में सोमवार को दिल्ली में पत्रकारों ने प्रदर्शन भी किया था और मंगलवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने न केवल प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए उनकी रिहाई के आदेश दिए। बल्कि ये भी स्पष्ट तौर पर कहा कि आज़ादी का अधिकार मौलिक अधिकार है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता। और शामली के तो इस ताज़ा मामले में रिपोर्टिंग करने गए पत्रकार से उनकी पुरानी रिपोर्ट से नाराज़गी के चलते मारपीट और इस तरह का अमानवीय व्यवहार किया गया। यानी अब पत्रकारों को अपना काम करने से भी रोका जाएगा और कोई रिपोर्ट पसंद न आने पर पीटा जाएगा। हवालात में डाल दिया जाएगा। तो क्या अब कोई भी रिपोर्ट करने से पहले सरकार और पुलिस-प्रशासन से इजाज़त लेनी होगी।

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