एससी-एसटी एक्ट में बदलाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 30 अप्रैल से अंतिम सुनवाई

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नई दिल्ली: एससी-एसटी एक्ट में बदलाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 30 अप्रैल से अंतिम सुनवाई करेगा। पिछले साल कोर्ट ने इस एक्ट के तहत तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। बाद में सरकार ने कानून बदल कर ये प्रावधान फिर जोड़ दिया था। इसके खिलाफ याचिकाओं और सरकार की पुनर्विचार अर्ज़ी पर साथ सुनवाई होगी।

24 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट में सरकार की ओर से किये गए बदलाव के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार की ओर से किये गए संशोधन पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में एससी एसटी एक्ट के मामलों में तुरंत गिरफ्तारी के प्रावधान का विरोध किया गया है।याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी लेकिन सरकार ने बदलाव कर रद्द किए गए प्रावधानों को फिर से जोड़ दिया।

7 सितंबर, 2018 को याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को निष्प्रभावी करने वाले संशोधन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

याचिका वकील प्रिया शर्मा और पृथ्वी राज चौहान ने दायर की है। याचिका में केंद्र सरकार के नए एससी-एसटी संशोधन कानून 2018 को असंवैधानिक बताया गया है। याचिका में कहा गया है कि इस नए कानून से बेगुनाह लोगों को फिर से फंसाया जाएगा। याचिका में मांग की गई है कि सरकार के इस नए कानून को असंवैधानिक करार दिया जाए । याचिका में मांग की गई है कि इस याचिका के लंबित रहने तक कोर्ट नए कानून के अमल पर रोक लगाए।

केंद्र सरकार ने इस संशोधित कानून के जरिये एससी एसटी अत्याचार निरोधक कानून में धारा 18ए जोड़ी है। इस धारा के मुताबिक इस कानून का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच की जरूरत नहीं है, न ही जांच अधिकारी को गिरफ्तारी करने से पहले किसी से इजाजत लेने की जरूरत है। संशोधित कानून में ये भी कहा गया है कि इस कानून के तहत अपराध करने वाले आरोपित को अग्रिम जमानत के प्रावधान का लाभ नहीा ।

20 मार्च, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एससी एसटी अत्याचार निरोधक कानून में शिकायत मिलने के बाद तुरंत मामला दर्ज नहीं होगा । डीएसपी पहले शिकायत की प्रारंभिक जांच करके पता लगाएगा कि मामला झूठा तो नहीं है । सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एफआईआर दर्ज होने के बाद अभियुक्त को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी से पहले सक्षम अधिकारी और सामान्य व्यक्ति की गिरफ्तारी से पहले एसएसपी की मंजूरी ली जाएगी।

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