Itanagar (Arunachal Flash Flood) : अरुणाचल प्रदेश के कीयी पन्योर जिले में बुधवार सुबह बादल फटने और भारी बारिश के बाद आई फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। याचुली क्षेत्र के पास स्थित NEEPCO कॉलोनी और आसपास के इलाकों में अचानक आए तेज बहाव ने घरों, सड़कों और अन्य ढांचों को बुरी तरह प्रभावित किया। ताजा जानकारी के अनुसार इस आपदा में 5 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जबकि 17 लोग घायल हुए हैं। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि सुबह करीब 6 बजे के आसपास इलाके में बादल फटने जैसी स्थिति बनी, जिसके बाद कई नाले और बरसाती धाराएं उफान पर आ गईं। देखते ही देखते पानी और मलबा रिहायशी क्षेत्रों में घुस गया और NEEPCO की 43 कॉलोनी सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल रही। तेज बहाव के कारण कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि एक पुल भी बह जाने की खबर है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक इस आपदा में 50 से अधिक घरों को नुकसान पहुंचा है।
फ्लैश फ्लड का असर 405 मेगावाट पन्योर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के आसपास भी देखा गया। परियोजना प्रबंधन की ओर से जिला प्रशासन को दी गई जानकारी के अनुसार हादसे में कई लोग घायल हुए हैं। गंभीर रूप से घायल तीन लोगों को इलाज के लिए ज़ीरो भेजा गया, लेकिन रास्ते में पिटापूल के पास सड़क बंद होने के कारण उन्हें प्रभावित हिस्से से हाथों के सहारे पार कराकर आगे एंबुलेंस तक पहुंचाया गया। इससे इलाके में आपदा की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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स्थानीय विधायक टोको तातुंग ने बताया कि कीयी पन्योर जिला अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई छोटे नाले उफान पर आ गए, जिससे NEEPCO कॉलोनी और आसपास के रिहायशी हिस्सों में भारी नुकसान हुआ। प्रशासन की टीमें मौके पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं और लापता लोगों की तलाश जारी है।
राज्य सरकार ने भी हालात पर नजर बनाए रखी है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और प्रशासन को राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोगों से सतर्क रहने, अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।
लगातार बारिश और भूस्खलन की आशंका के बीच प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने को कहा है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, घायलों का इलाज और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है।
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