ऋण शोधन पर आरबीआई के सर्कुलर को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज, समय पर कर्ज न चुकाने वाली कंपनियों को राहत

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नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा पिछले साल जारी किए गए उस सर्कुलर को खारिज कर दिया है, जिसमें कर्ज लौटाने में एक दिन की भी चूक पर किसी कंपनी को दिवालिया घोषित करने का प्रावधान किया गया है। जस्टिस आर एफ नरीमन ने अपने फैसले में कहा कि हमने आरबीआई के सर्कुलर को असंवैधानिक घोषित किया है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 12 फरवरी, 2018 को एक सर्कुलर जारी कर कहा था कि बैंकों को 2000 करोड़ रुपए और इससे अधिक के बड़े खाते के मामले में एक दिन की भी चूक की स्थिति में दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता कानून के तहत 180 दिनों के भीतर ऋण समाधान योजना पेश करनी होगी।

इसमें कहा गया था कि यदि 27 अगस्‍त तक की निर्धारित अवधि में कोई समाधान नहीं तलाशा जा सके तो गैर निष्‍पादित आस्तियां (एनपीए) खातों को राष्‍ट्रीय कंपनी विधि प्राधिकरण के समक्ष रखा जाए। हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान, शीर्ष अदालत ने पिछले साल 11 सितंबर को बैंकों से इस सर्कुलर पर यथास्थिति बनाए रखने और डिफॉल्‍ट करने वाली कंपनियों के खिलाफ दिवालियेपन की कार्रवाई शुरू न करने का निर्देश दिया था।

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