वो आते हैं और हम उनके हो जाते हैं

Please Share

देहरादून: धन है देवभूमि। हे देवभूमि अब चिंता मत करना। तेरे रखवाले स्वर्ग से धरती पर उतर आए हैं। तुझे दुष्टों और पापियों से मुक्त कराने का संकल्प लेकर। संकल्प शुरू में सब यही लेते हैं। पर जब असल में कुछ करने बारी आती है, तो संकल्प देवभूमि ना रहकर अपने तक ही सिमट जाता है। मकसद केवल दो। एक पैसा कमाना। दूसरा राज करना। किसी को यहां से होकर दिल्ली जाना है, तो किसी को दिल्ली से आकर यहां राज करना है। पिछले कुछ समय से ऐसा ही होता नजर आ रहा है।
कोई बहुगुणों से धनी होकर आए, वो सब कुछ लेकर वापस इंद्रप्रस्त (दिल्ली) चले गए। कुछ ऐसे थे, जिनकी मेल दिल्ली से चलती है। देहरादून के बाद मैदान समाप्त होते ही मेल भी पहाड़ चढ़ने में फेल हो जाती है। अब तक जो आया, उसने अपना जौहर दिखाया। कुछ अब आएंगे वो अपना सौर्य दिखाएंगे। पता नहीं क्या होगा, देवभूमि का। क्या-क्या सहना और भोगना पड़ेगा।
दोष उनका भी नहीं। हम उत्तराखंडियों का है, जो यहां के वासियों को छोड़ प्रवासियों के झांसे में आ जाते हैं। दिल्ली से चले पहाड़ी नारों में अपना अस्तित्व खेजाने लगते हैं। भूल जाते हैं कि दिल्ली वाले तो बस नारे ही लगवाते हैं। करते-धरते कुछ नहीं। पहाड़ में चुनाव जीतने के बाद पहाड़ चढ़ना नेताओं के लिए एवरेस्ट हो जाता है और चुनाव आते ही पहाड़ भी मैदान लगने लगता है।
जागो। आखें कब तक बंद रखेंगे। बहुगुणी, प्रतापी, बहादुर और सौर्य के ध्योतक प्रवासी आकर यहां अपना वास भी नहीं बनाते और हम उनके पीछे अपना निवास ही छोड़ने को राजी हो जाते हैं। जरा भी वक्त नहीं लगता कब पहाड़ी से मैदानी हो गए। कुछ पहले आए थे, कुछ अब आएंगे। कुछ आने की जमीन तैयार कर चुके हैं। बस उस जमीन में बीज बोने के लिए अभी खुदाई कर रहे हैं। वो अपने लिए तो जमीन खोद रहे हैं, पर आपके लिए वो किसी गड्ढे से कम नहीं। उनका लक्ष्य भी यही होता है कि एक बार जो इस गड्ढे में गिर जाए वो फिर संभल ही ना पाए…जय देवभूमि…जय उत्तराखंड।

admin

Passionate about independent journalism and committed to delivering timely, accurate news to our readers. As the driving force behind Hindi News Bharat, I focus on bringing important regional and national stories to light, ensuring that truthful reporting remains at the forefront of digital media.

You May Also Like