“ये देश में ईमानदारी के लिए तड़पते हुए नागरिक की आशा-आकांक्षा की विजय है”, जानिए पीएम मोदी भाषण की बड़ी बातें..

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नई दिल्ली: रुझानों में एनडीए की सीट संख्या 300 के पार पहुंच गई है। इसके अलावा अकेले बीजेपी अपने दम पर बहुमत से भी ज्यादा मतों से आगे चलकर केंद्र में सरकार बनाने के लिए तैयार है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने देश की जनता का आभार व्यक्त किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी कार्यालय में बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करना शुरू कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के साथ पार्टी हेडक्वार्टर पहुंचे पीएम मोदी का लोगों ने फूलों की बारिश कर के स्वागत किया।

PM मोदी का भाषण

चुनावों के बीच क्या हुआ, मेरे लिए वो बात बीत चुकी है। हमें सबको साथ लेकर चलना है। घोर विरोधियों को भी देशहित में उन्हें साथ लेकर चलना है। इस प्रचंड बहुमत के बाद भी नम्रता के साथ लोकतंत्र की मर्यादाओं के बीच चलना है। संविधान हमारा सुप्रीम है, उसी के अनुसार हमें चलना है।

अब देश में सिर्फ दो जाति ही रहने वाली हैं और देश इन दो जातियों पर ही केंद्रित होने वाला है। 21वीं सदी में भारत में एक जाति है- गरीब और दूसरी जाति है- देश को गरीबी से मुक्त कराने के लिए कुछ न कुछ योगदान देने वालों की। 

ये विजय देश के उन किसानों की है, जो पसीना बहाकर राष्ट्र का पेट भरने के लिए अपने को परेशान करता रहता है। ये उन 40 करोड़ असंगठित मजदूरों की विजय है, जिन्हें पेंशन योजना लागू करके सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला है। इस चुनाव ने 21वीं सदी के लिए एक मजबूत नींव हमारे सामाजिक, सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन के लिए निर्मित की है।

2014 से 2019 आते आते सेक्युलरिज्म की जमात ने बोलना बंद कर दिया। इस चुनाव में एक भी राजनैतिक दल सेक्युलरिज्म का नकाब पहन कर जनता को गुमराह नहीं कर पाया। ये चुनाव ऐसा है, जहां महंगाई को एक भी विरोधी दल मुद्दा नहीं बना पाया। ये चुनाव ऐसा है जिसमें कोई भी दल हमारी सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर उसे मुद्दे नहीं बना पाया।

ये विजय आत्मसम्मान, आत्मगौरव के साथ एक शौचालय के लिए तड़पती हुई उस मां का विजय है। ये विजय उस बीमार व्यक्ति की है जो 4-5 साल से पैसों कमी की वजह से अपना उपचार नहीं करवा पा रहा था और आज उसका उपचार हो रहा है। ये उसके आशीर्वाद की विजय है।

-पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज स्वयं मेघराज भी इस विजय दिवस उत्सव में शरीक होने के लिए हमारे बीच है। जब से देश आजाद हुआ है तब से कई सारे चुनाव हुए हैं लेकिन इस चुनाव में सबसे ज्यादा रिकॉर्ड संख्या में वोटिंग हुई है। 40 से 42 डिग्री की भीषण गर्मी में लोगों ने वोट किया।

-2019 लोकसभा के चुनाव में हम सब देशवासियों के पास नए भारत के लिए जनादेश लेने गए थे। आज हम देख रहे हैं कि देश के कोटि-कोटि नागरिकों ने इस फकीर की झोली को भर दिया है। ये जो मतदान का आंकड़ा है ये अपने आप में लोकतांत्रिक विश्व के इतिहास की सबसे बड़ी घटना है। देश आजाद हुआ इतने लोकसभा के चुनाव हुए, लेकिन आजादी के बाद इतने चुनाव होने के बाद सबसे अधिक मतदान इस चुनाव में हुआ है।

-मैं इस लोकतंत्र के उत्तव में लोकतंत्र की खातिर, जिन-जिन लोगों ने बलिदान दिया है, जो घायल हुए हैं, उनके पारिवारजनों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं। इस चुनाव में मैं पहले दिन से कहा रहा था कि ये चुनाव कोई दल नहीं लड़ रहा है, कोई उम्मीदवार नहीं लड़ रहा है, कोई नेता नहीं लड़ रहा है। ये चुनाव देश की जनता लड़ रही है।

-महाभारत के युद्ध के बाद श्रीकृष्ण से पूछा गया था कि वो किसके पक्ष में थे। जो जवाब तब श्रीकृष्ण ने दिया था, वही जवाब आज देश की जनता ने दिया है। श्रीकृष्ण ने तब कहा था कि मैं किसी के पक्ष में नहीं था, मैं सिर्फ हस्तीनापुर के पक्ष में खड़ा था। आज भारत के 130 करोड़ नागरिक भारत के पक्ष में खड़े थे, भारत के पक्ष में उन्होंने मतदान किया।

-जिनके आंख-कान बंद थे उनके लिए मेरी बात समझना मुश्किल था। लेकिन आज मेरी उस भावना को जनता-जर्नादन ने प्रकट कर दिया है। इसलिए अगर कोई विजयी हुआ है तो हिंदुस्तान विजयी हुआ है। अगर कोई विजयी हुआ है तो लोकतंत्र विजयी हुआ है। हम सभी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता, हम सभी एनडीए के साथी, नम्रता पूर्वक इस विजय को जनता-जर्नादन के चरणों में समर्पित करते हैं।

-जो उम्मीदवार विजयी हुए हैं, उन सभी को मैं ह्रदयपूर्वक बधाई देता हूं। वो किसी भी दल से आए हों, लेकिन देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए कंधे से कंधा मिलाकर ये सभी विजयी उम्मीदवार देश की सेवा करेंगे, इस विश्वास के साथ मैं उन्हें शुभकामना देता हूं।

-हम दो थे, तब भी निराश नहीं हुए। अब दोबारा आए हैं तब भी न नम्रता छोड़ेगे, न विवेक को छोड़ेंगे, न हमारे आदर्शों को छोड़ेंगे, न हमारे संस्कारों को छोड़ेंगे। ये 21वीं सदी है, ये नया भारत है। ये चुनाव की विजय मोदी की विजय नहीं है। ये देश में ईमानदारी के लिए तड़पते हुए नागरिक की आशा-आकांक्षा की विजय है। यह 21वीं सदी के सपनों को लेकर चल पड़े नौजवान की विजय है।

 

admin

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