खटीमा में मुख़्यमंत्री धामी करेंगे सुरई इकोटूरिज्म जोन’ में जंगल सफारी व ‘ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल’ का लोकार्पण, पहली बार नेशनल पार्क और बायोस्फीयर रिजर्व क्षेत्र से बाहर अन्य क्षेत्र में संचालित होगी जंगल सफारी

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खटीमा: वर्ष 2021 के जाते-जाते प्रदेश की धामी सरकार खटीमा विधानसभा क्षेत्र को एक बड़ी सौगात देने जा रही है। 29 दिसम्बर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा में ‘सुरई इकोटूरिज्म जोन’ और ‘ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल’ का लोकार्पण करेंगे। ‘सुरई इकोटूरिज्म जोन’ प्रदेश का पहला ऐसा इकोटूरिज्म जोन होगा जहां पर्यटक जंगल सफारी का लुत्फ उठा सकेंगे। अब तक हमारे प्रदेश में सिर्फ नेशनल पार्क और बायोस्फीयर रिजर्व (संरक्षित क्षेत्र) में ही जंगल सफारी का चलन रहा है। इसके अलावा ‘ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल’ देश का पहला क्रोकोडाइल ट्रेल है जहां पर्यटक बेहद नजदीक जाकर मगरमच्छ की खतरनाक प्रजाति ‘मार्श’ का सुरक्षित दीदार कर सकेंगे। यह दोनों योजनाएं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पूर्व में घोषित ‘सी.एम. यंग ईकोप्रिन्योर स्कीम’ (CM Young Ecopreneur Scheme) से जुड़ी हुई हैं जिसके तहत उत्तराखण्ड के स्थानीय लोगों की आर्थिकी को वनों और वन्य जीवों से जोड़कर स्वरोजगार के अवसर पैदा किए जा रहे हैं। इस स्कीम के अंतर्गत 1 लाख युवाओं को ईकोप्रिन्योर बनाने का लक्ष्य है।

खटीमा में मुख़्यमंत्री धामी करेंगे सुरई इकोटूरिज्म जोन' में जंगल सफारी व 'ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल' का लोकार्पण, पहली बार नेशनल पार्क और बायोस्फीयर रिजर्व क्षेत्र से बाहर अन्य क्षेत्र में संचालित होगी जंगल सफारी 2 Hindi News Bharat »

तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ संदीप कुमार ने बताया कि चारों ओर वन क्षेत्र से घिरे खटीमा के लोगों को पर्यावरण संरक्षण के साथ कैसे स्वरोजगार से जोड़ा जाए इसके लिए एक अभिनव योजना को धरातल पर उतारा जा रहा है। अब तक पर्यटन के लिहाज से पिछड़े रहे खटीमा व आसपास के क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र में ऊंचा स्थान दिलाना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सोच है कि जैव विविधता और वन्य जीवों की मौजूदगी वाले ‘तराई पूर्वी वन प्रभाग’ को योजनाबद्ध तरीके से विकसित कर उसके सुराई वन क्षेत्र को इको टूरिज्म जोन के रूप में तब्दील किया जाए ताकि यहां के प्राकृतिक सौन्दर्य का उपयोग स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मुहैया करवाने में किया जा सके। इसी सिलसिले में पूर्व में उन्होंने ‘तराई पूर्वी वन प्रभाग’ के सुरई व आसपास के वन क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की घोषणा (संख्या-359/2021) की थी। उसके बाद से ही वन महकमा उनकी इस घोषणा को साकार करने में जुटा हुआ है। योजना को चार भागों में बांटकर धरातल पर उतारा जा रहा है। इनमें सुरई इकोटूरिज्म जोन, ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल, खटीमा सिटी फॉरेस्ट और चुका प्रवासी पक्षी केन्द्र की स्थापना शामिल है। उन्होंने बताया कि सुरई इकोटूरिज्म जोन और ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल योजना का निर्माण और विकास कार्य पूरा हो चुका है। जबकि खटीमा सिटी फॉरेस्ट और चुका प्रवासी पक्षी केन्द्र के विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री श्री धामी आगामी 29 दिसम्बर को सुरई इकोटूरिज्म जोन में जंगल सफारी का शुभारम्भ और ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल का लोकार्पण करने जा रहे हैं।

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सुरई इकोटूरिज्म जोन 
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की थी कि सुरई वनों की समृद्ध जैव विविधता को देखते हुए इसे क्षेत्र को सुरई इको टूरिज्म जोन (सुरई पारिस्थितिकी पर्यटन क्षेत्र) का स्वरूप प्रदान किया जाएगा। इसके दो लाभ होंगे पहला यह कि जनसहभागिता सुनिश्चित करते हुए जैव विविधता के धनी इसे क्षेत्र को संरक्षित किया जाएगा और दूसरा, इसके वन मार्गों को जंगल सफारी के लिए विकसित किए जाने से यहां रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। वन महकमे ने मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर रात-दिन काम करते हुए सुरई वन क्षेत्र के वन मार्गों को जैव विविधता ट्रेल के रूप में विकसित कर दिया गया है। यह क्षेत्र 180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। जिसके सीमा में पूर्व दिशा में शारदा सागर डैंम, पश्चिम में खटीमा नगर, उत्तर में मेलाघाट रोड तथा दक्षिण में पीलीभीत टाइगर रिजर्व क्षेत्र सटा हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत इस वन क्षेत्र में साल के वृक्षों, चारागाह और पानी की प्रचुर मात्रा में है। इन तमाम वजहों से यहां बाघों की आवाजाही बनी रहती है। इसके अलावा स्तनधारी जानवरों की लगभग 125, पक्षियों की 150 से अधिक और सरीसृपों को तकरीबन 20 प्रजातियां भी इस वन क्षेत्र में पाई जाती हैं। यहां के वन मार्गों को विकसित कर लगभग 40 किलोमीटर का ट्रेल जंगल सफारी के लिए तैयार कर लिया गया है, जिसमें जिप्सी में बैठकर पर्यटक दुर्लभ वन्य जीवों (रॉयल बंगाल टाइगर, भालू, चीतल, सांभर, काकड़, पैंगोलिन, कोरल सांप, पांढा आदि) का दीदार करने के साथ ही सुरम्य जंगलों, घास के मैदानों, प्राचीन शारदा नहर और सुन्दर तालाबों का लुत्फ उठा सकेंगे।

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ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल 
सुरई इकोटूरिज्म जोन की पश्चिमी सीमा पर ककरा नाला स्थित है। यह नाला क्रोकोडाइल ( मार्श मगरमच्छ) का प्राकृतिक वासस्थल है। मीठे पानी के स्रोतों में पाई जाने वाली मगरमच्छ की यह प्रजाति भूटान और म्यांमार जैसे तमाम देशों में विलुप्त हो चुकी है। अंडा देने वाली यह प्रजाति बेहद खतरनाक मानी जाती है। मौजूदा समय में इस नाले में 100 से अधिक मार्श मगरमच्छ हैं। पर्यटक इन मगरमच्छों को आसानी से दीदार कर सकें इसके लिए 4 किलोमीटर लम्बे नाले को चैनलिंग फैंसिंग करके ‘ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल’ के रूप में विकसित किया गया है। यह राज्य का पहला क्रोकोडाइल ट्रेल है। ट्रेल में तीन व्यू प्वाइंट और कई वॉच टॉवर बनाए गए हैं ताकि मगरमच्छों का सुरक्षित तरीके से नजदीक से दीदार हो सके।

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वन और वन्य जीव बनेंगे आर्थिकी का जरिया : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि हमारे प्रदेश में वन बहुतायत में पाए जाते हैं। प्रदेश का 71 प्रतिशत (37999.53 वर्ग किलोमीटर) भूभाग वन क्षेत्र है। इसमें से 24418.67 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र वन विभाग के अन्तर्गत है। वन कानून की जटिलताओं के कारण वनों के आसपास रहने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिसमें उनकी खेती भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि इस कठिनाई को समझते हुए हमने निर्णय लिया है कि वन और वन्य जीवों को आर्थिकी से जोड़ते हुए स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर मुहैया करवाए जाएंगे। इसी सोच के साथ हमने बीते 1 अक्टूबर 2021 को ‘सीएम यंग ईकोप्रिन्योर योजना’ देहरादून में लॉच की थी। इस योजना का क्रियान्वयन शुरू कर दिया गया है। शुरुआत के तौर पर खटीमा में ‘सुरई इकोटूरिज्म जोन’ विकसित कर उसमें जंगल सफारी प्रारम्भ की जा रही है। ग्राम समितियों के जरिए इस योजना का संचालन किया जाएगा। जंगल सफारी शुरू होने से जिप्सी मालिक, चालक और गाइड के रूप में स्थानीय युवाओं को रोजागर मिलेगा। इसके लिए वन विभाग ने 30 जिप्सी संचालकों के साथ करार किया है। गाइड की भूमिका का सही निर्वहन करने के लिए कई युवकों को वन विभाग इसका प्रशिक्षण दे चुका है। ‘सुरई इकोटूरिज्म जोन’ में पर्यटकों की आमद से स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। पूरे प्रदेश में इस योजना को विस्तार दिया जाएगा ताकि वनों, वन क्षेत्रों और वन्य जीवों को हम अपनी कमजोरी नहीं ताकत बना सकें। उन्होंने कहा कि सीएम यंगईकोप्रिन्योर स्कीम के अंतर्गत नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, ईकोटूरिज़्म, वन्यजीव टूरिज़्म आधारित कौशल को उद्यम में परिवर्तित किया जाएगा।

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admin

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